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Subject:
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Paper ID:
IJSREM67426
Volume:
10 |
9 |
Sep 2026
Pages:
1-7
Publication Frequency:
Monthly (12 issues per year)
License:International Journal of Scientific Research in Engineering and Management follows the Creative Commons Attribution 4.0 (CC BY 4.0) License, allowing free use and distribution with proper attribution.
Assistant Professor
Teachers’ Training College, Bhagalpur
राष्ट्रीय शिक्षा नीशि (NEP) 2020 भारि को एक आत्मशनभभर, समृद्ध और ज्ञान-आधाररि वैशिक महािशि बनाने के शिए िैयार की गई एक युगाांिकारी पहि है। पारांपररक मैकािे शिक्षा पद्धशि की रटांि प्रणािी और केवि शिग्री-केंशिि सोच को समाप्त कर, यह नीशि अनुभवात्मक शिक्षण, नवाचार (Innovation), व्यावहाररक कौिि और अनुसांधान पर शविेष बि देिी है। आत्मशनभभर भारि के शनमाभण में शिक्षा केवि रोजगार पाने का साधन नहीं, बशकक रोजगार-सृजन (Entrepreneurship) और राष्ट्र-शनमाभण का मुख्य आधार है। स्कूली शिक्षा में बदलाव: पुरानी 10+2 सांरचना को समाप्त कर 5+3+3+4 मॉिि िागू शकया गया है। इसमें कम उम्र से ही कोशिांग, िाशकभ क शचांिन और व्यावहाररक ज्ञान पर ध्यान शदया जािा है। व्यावसाशयक शिक्षा (Vocational Education): कक्षा 6 से ही व्यावसाशयक शिक्षा और इांटनभशिप को अशनवायभ शकया गया है, िाशक युवा आत्मशनभभर बनकर अपनी रुशचयों के अनुसार स्वरोजगार चुन सकें। बहु-शवषयक दृशिकोण (Multidisciplinary Learning): उच्च शिक्षा में किा, शवज्ञान और वाशणज्य के बीच की कठोर सीमाओां को हटाकर िचीिी शिक्षा और एकेिशमक बैंक ऑफ क्रेशिट (ABC) के साथ मकटीपि एांरी-एशजजट शवककप शदए गए हैं। मातृभाषा में शिक्षा: प्रारांशभक स्िर पर स्थानीय और क्षेत्रीय भाषा में शिक्षण को प्राथशमकिा दी गई है, शजससे समझ की नींव मजबूि होिी है। अनुसंधान एवं नवाचार: नेिनि ररसचभ फाउांिेिन (NRF) के माध्यम से देि में िोध और नई िकनीकों (AI, रोबोशटक्स) को बढावा शदया जा रहा है।
KEYWORDS
शिक्षा में समान पाठ्यक्रम और समान गुणवत्ता को बनाये रखने की आवश्यकिा है शजससे शक हम पूांजीवादी िैक्षशणक स्िरीकरण को कम कर सके और समान शिक्षा व समान अवसर उपिधध करा सकें। शिक्षा में विभमान िथा भशवष्ट्य के राजनीशिज्ञों, समाज सेवकों, प्राध्यापकों, अशभभावकों को शिक्षा की बदििी प्रकृशि का ध्यान रखना प़िेगा। छात्र-छात्राओां को भी अपनी रुशच बनाये रखनी होगी। सरकार को भी अपनी व्यवस्था का समय के अनुसार बार-बार शनरीक्षण करके सुधार करिे हुए आगे बढना होगा। हम िभी शिक्षा के नये उद्देश्यों को प्राप्त कर पायेंगे िथा भारि को आत्मशनभभर बना पायेंगे जब भारि का प्रत्येक नागररक इसके शिए कशटबद्ध और समशपभि होगा।
1. विेहरा शकरण एवां जॉजभ कोरेथ, मशहिा सिशिकरण, सेज पशधिकेिन, नई शदकिी, 2017, पेज-55 2. दोषी एस.एि., आधुशनक समाजिास्त्रीय शवचारक, रावि पशधिकेिन, नई शदकिी, 2010, पेज-139 3. अग्रवाि जी.के., समाजिास्त्र, बी.ए. शद्विीय वषभ, एस.वी.पी.िी. पशधिकेिन हाउस, आगरा, 2017, पेज-240 4. अग्रवाि जी.के., समाजिास्त्र, बी.ए. शद्विीय वषभ, एस.वी.पी.िी. पशधिकेिन हाउस, आगरा, 2017, पेज-162 5. अग्रवाि जी.के., समाजिास्त्र, बी.ए. शद्विीय वषभ, एस.वी.पी.िी. पशधिकेिन हाउस, आगरा, 2017, पेज-240 6. दोषी एस.एि., आधुशनक समाजिास्त्रीय शवचारक, रावि पशधिकेिन, नई शदकिी, 2010, पेज-330 7. िधकयू िधकयू िधकयू इांटरनेट: नई शिक्षा नीशि 2020
Publication Date
9/24/2026
Peer Review Type
Double-Blind Peer Review
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The authors declare no conflict of interest related to this research work.
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