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ArticlePeer ReviewedOpen AccessPlagiarism Passed
Paper ID:IJSREM66265

बाल-सुधार गृहों में रहने वाले बाल-अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता एवं उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य सम्बन्ध का अध्ययन

Stream/Area:

-

Subject:

-

Paper ID:

IJSREM66265

Volume:

10 |

7 |

Jul 2026

Pages:

1-7

Publication Frequency:

Monthly (12 issues per year)

DOI
Digital Object Identifier
10.55041/IJSREM66265

License:International Journal of Scientific Research in Engineering and Management follows the Creative Commons Attribution 4.0 (CC BY 4.0) License, allowing free use and distribution with proper attribution.

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Authors

मकम

मनीष कुमार मिश्र

शोधार्थी

शिक्षा विभाग, हिन्दू कॉलेज मुरादाबाद

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Mentors

पआम

प्रो० आर०पी० मिश्र

शोधार्थी

शिक्षा विभाग, हिन्दू कॉलेज मुरादाबाद

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Full ArticlesAcceptance Certificate

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र बाल सुधार गृहों में रहने वाले बाल-अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता एवं उनकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य संबंध एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं समकालीन विषय पर आधारित है, जो शिक्षा एवं मनोविज्ञान के समन्वित दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है। प्रत्येक बालक का यह मौलिक अधिकार है कि सामाजिक एवं मानसिक विकास हेतु उत्तम सुविधायें प्राप्त हो। बाल अपराधियो द्वारा किये जाने वाले अपराधिक कृत्य इस प्रकार है, जैसे -घर से भाग जाना, दुसरो को चोंट पहुचाना, गलत लोगो की संगति मे रहना, स्कूल से भाग जाना, शराब का सेवन करना, तम्बाकू , सिगरेट, आदि का प्रयोग करना जुआ घरो एवं वेश्यालयों में जाना, असामाजिक आचरण करना, अनैतिक यौनाचर में संलग्न रहना, चोरी करना, डकैती करना, दुष्कर्म करना, आदि। भारत में सामान्य रुप से छोटे अपराध और विशेषरुप में जघन्य अपराध बच्चो द्वारा नियमित रुप से किये जा रहे है दुर्भाग्य की बात यह है कि इस तरह के सभी अपराध 18 साल को आयु से कम के बच्चों द्वारा किये जा रहे है। इस प्रकार बाल अपराध में बालको के असामाजिक व्यवहारो को लिया जाता है अथवा बालको के ऐसे व्यवहार जो लोक कल्याण की दृष्टि से अहितकर होते है, ऐसे कार्यो को करने वाला बाल अपराधी कहलाता है। राबिन्सन के अनुसार-आवारागर्दी, भीख मांगना, इधर-उधर घूमना, उदण्डता बाल अपराधी के लक्षण है। सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति सबसे बङा कारण है, जो बच्चो को अपराधिक गतिविधियो में शामिल हाने के लिए मजबूर करती है इसके अलावा आजकल मीडिया की भूमिका भी किशोरो के सृजनात्मक क्षमता पर साकारात्मक प्रभाव के स्थान पर नाकारात्मक प्रभाव अधिक डालती है। इस शोध में गोरखपुर मण्डल के बाल सुधार गृहों में रहने वाले 210 बाल-अपराधियों (110 नगरीय एवं 100 ग्रामीण) को नमूने के रूप में लिया गया तथा प्रश्नावली के माध्यम से आँकड़ों का संग्रह किया गया। अध्ययन के उद्देश्यों के अनुरूप नगरीय एवं ग्रामीण दोनों वर्गों के बाल अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता एवं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य संबंध का परीक्षण किया गया। परिकल्पनाओं के विश्लेषण से यह ज्ञात हुआ कि नगरीय बाल अपराधियों में सहसम्बन्ध का मान 0.42 तथा ग्रामीण बाल अपराधियों में 0.36 प्राप्त हुआ, जो दोनों ही स्थितियों में 0.01 स्तर पर सार्थक पाया गया। यह परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि दोनों चरों के मध्य धनात्मक एवं महत्वपूर्ण सहसम्बन्ध विद्यमान है, अर्थात जिन बालकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर होती है, उनकी सृजनात्मक क्षमता भी अधिक सकारात्मक होती है। अध्ययन के निष्कर्ष यह सिद्ध करते हैं कि सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ बाल-अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता के विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं और यही उनके पुनर्वास की सफलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अतः यह आवश्यक है कि बाल सुधार गृह के शिक्षकों तथा प्रशिक्षकों द्वारा शिक्षा प्रदान करते समय बच्चों की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखा जाए तथा उनके लिए उपयुक्त, व्यावहारिक एवं प्रेरणादायक व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाएँ। इस प्रकार, यह अध्ययन न केवल बाल-अपराध की समस्या को समझाने में सहायक है, बल्कि एक समावेशी एवं संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।

KEYWORDS

बाल-सुधार गृह बाल अपराधी सृजनात्मक क्षमता सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति

Cite This Article

मनीष कुमार मिश्र, प्रो० आर०पी० मिश्र, "बाल-सुधार गृहों में रहने वाले बाल-अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता एवं उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य सम्बन्ध का अध्ययन," International Journal of Scientific Research in Engineering and Management, vol. 10, no. 7, pp. 1-7, Jul 2026. https://doi.org/10.55041/IJSREM66265

Full Article/Conclusion

तालिका संख्या 2  में बाल सुधार गृहों में रहने वाले ग्रामीण बाल अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता एवं उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य सम्बन्ध को दर्शाया गया है। दोनों के मध्य सहसम्बन्ध का मान 0.36 प्राप्त हुआ है। प्राप्त मान दोनों के बीच धनात्मक सहसम्बन्ध को प्रदर्शित करता है। जिससे सिद्ध होता है कि बाल सुधार गृहों में रहने वाले ग्रामीण बाल अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता का उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मध्य धनात्मक सहसम्बन्ध पाया जाता है। शोध अध्ययन के निष्कर्ष:- ·        बाल-सुधार गृहों में रहने वाले नगरीय बाल-अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता एवं उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति के मध्य सार्थक सहसम्बन्ध पाया गया। ·        बाल-सुधार गृहों में रहने वाले ग्रामीण बाल अपराधियों की सृजनात्मक क्षमता एवं उनके सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति के मध्य सार्थक सहसम्बन्ध पाया गया।

References

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Publication Date

7/28/2026

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Double-Blind Peer Review

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The authors declare no conflict of interest related to this research work.

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