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Subject:
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Paper ID:
IJSREM45080
Volume:
9 |
4 |
Apr 2025
Pages:
Publication Frequency:
Monthly (12 issues per year)
License:International Journal of Scientific Research in Engineering and Management follows the Creative Commons Attribution 4.0 (CC BY 4.0) License, allowing free use and distribution with proper attribution.
भागलपुर जिला, बिहार के अंग क्षेत्र में गंगा नदी के तट पर स्थित, उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और अनुकूल जलवायु के कारण कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां धान, गेहूं, मक्का, सब्जियां तथा फल जैसे जर्दालू आम और कतरनी चावल की खेती प्रमुख है। हरित क्रांति के बाद अपनाए गए कृषि नवाचारों उच्च उपज वाली किस्में (HYV), रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, नलकूप सिंचाई, यांत्रिकीकरण तथा हाल के नवाचार जैसे डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), श्री विधि (SRI), जलवायु अनुकूल किस्में और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर द्वारा विकसित तकनीकें ने जिले की कृषि को प्रभावित किया है। ये नवाचार सकारात्मक रूप से उत्पादकता बढ़ाने, आय वृद्धि करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहे। BAU सबौर के जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम (CRA) से भागलपुर में फसल सघनता 202 प्रतिशत से बढ़कर 261 प्रतिशत हो गई, उपज में 17 प्रतिशत तक वृद्धि हुई तथा ड्रिप सिंचाई और जैव उर्वरकों से जल संरक्षण हुआ। सब्जी क्लस्टर और फल खेती से किसानों की आय दोगुनी हुई, जबकि SABAGRIs जैसे इनक्यूबेशन केंद्रों ने एग्री-स्टार्टअप को बढ़ावा दिया। हालांकि, नकारात्मक प्रभाव भी गंभीर हैं। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता ह्रास, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और चभ् असंतुलन हुआ। नलकूपों से भूजल का अति-दोहन स्तर गिरा रहा है, जबकि कीटनाशकों का रनऑफ नदियाँ-तालाबों को प्रदूषित कर जैव विविधता को हानि पहुंचा रहा है। मोनोक्रॉपिंग से स्थानीय किस्में लुप्त हुईं और छोटे किसानों पर उच्च लागत का बोझ पड़ा। जलवायु परिवर्तन से चमर-मौसमी-प्रभाव की अनियमितता ने इन नवाचारों की सीमाएं उजागर कीं। यह भौगोलिक अध्ययन इन प्रभावों का विश्लेषण कर सतत-कृषि विकास पर जोर देता है। जैविक खेती, एकीकृत पोषक प्रबंधन और फसल विविधीकरण अपनाकर संतुलन स्थापित किया जा सकता है। BAU सबौर ‘लैब-टू-लैंड‘ और जल जीवन हरियाली मिशन जैसे प्रयास सकारात्मक दिशा दिखाते हैं, किंतु दीर्घकालिक सततता के लिए नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है।
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Publication Date
4/22/2025
Peer Review Type
Double-Blind Peer Review
Review Rounds: 2
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Conflict of Interest
The authors declare no conflict of interest related to this research work.
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No funding information available for this research.
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