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Subject:
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Paper ID:
IJSREM62864
Volume:
10 |
5 |
May 2026
Pages:
1-11
Publication Frequency:
Monthly (12 issues per year)
License:International Journal of Scientific Research in Engineering and Management follows the Creative Commons Attribution 4.0 (CC BY 4.0) License, allowing free use and distribution with proper attribution.
Research Scholar
Bundelkhand University, Jhansi
Associate Professor
Atarra post graduate college, Atarra
तब खासा ध्याि आकनषवत नकया जब प्रधािमंत्ऱी िरेंद्र मोद़ी िे 2022 में जालौि नजले में बुंदेलखंड एक्सप्रेसर्े के उद्घाटि के दौराि अपिे भाषण में इसका ऩिक्र नकया। चुिाऱ्ी प्रलोभि बांटिे पर बात करते हुए, प्रधािमंत्ऱी िे कहा, 'आज हमारे देश में उपहार बांटकर र्ोट बटोरिे क़ी संस्कृनत को बढार्ा देिे के नलए हर संभर् प्रयास नकया जा रहा है' [1] । 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक क़ी शुरुआत से, जो शुरू में कुछ अलग-थलग कल्याणकाऱी उपायों का एक समूह था, अब राजि़ीनतक दलों के नलए एक रणि़ीनतक चुिाऱ्ी हनथयार बि गया है, जो अपिे मतदाता आधार का नर्स्तार करिे और चुिार् ज़ीतिे के नलए इि कायवक्रमों का तेज़ी से उपयोग कर रहे हैं[2]। जहां एक ओर ये उपहार सामानजक कल्याण क़ी भार्िा से प्रेररत नदखते हैं, र्ह़ीं दूसऱी ओर ये अक्सर राजकोष़ीय अिुशासि को क्षनत पहुंचाते हैं। राज्य सरकारों पर क़िव का बोझ बढता है, बजट असंतुनलत होता है और आर्श्यक संरचिात्मक निर्ेशों क़ी अिदेख़ी होत़ी है। इसके अनतररक्त, यह तकव भ़ी नदया जाता है नक इस तरह क़ी घोषणाएं मतदाताओं क़ी स्वतंत्र इच्छा को प्रभानर्त कर लोकतांनत्रक प्रनक्रया को भ़ी कमजोर कर सकत़ी हैं। जहां एक ओर ये उपहार सामानजक कल्याण क़ी भार्िा से प्रेररत नदखते हैं, र्ह़ीं दूसऱी ओर ये अक्सर राजकोष़ीय अिुशासि को क्षनत पहुंचाते हैं। राज्य सरकारों पर क़िव का बोझ बढता है, बजट असंतुनलत होता है और आर्श्यक संरचिात्मक निर्ेशों क़ी अिदेख़ी होत़ी है। इसके अनतररक्त, यह तकव भ़ी नदया जाता है नक इस तरह क़ी घोषणाएं मतदाताओं क़ी स्वतंत्र इच्छा को प्रभानर्त कर लोकतांनत्रक प्रनक्रया को भ़ी कमजोर कर सकत़ी हैं। यह शोध पत्र मुख्य रूप से इस आनथवक द्वंद्व पर केंनद्रत है—एक ओर अल्पकानलक लोक-लुभार्ि व्यय, और दूसऱी ओर द़ीघवकानलक राजकोष़ीय उत्तरदानयत्व। शोध का उद्देश्य यह नर्श्लेषण करिा है नक नकस स़ीमा तक चुिाऱ्ी मुफ्त उपहार भारत क़ी सार्वजनिक नर्त्त व्यर्स्था पर बोझ डालते हैं, और यह प्रर्ृनत्त अथवव्यर्स्था के संतुनलत नर्कास के नलए नकस प्रकार खतरा उत्पन्न कर सकत़ी है। इस शोध पत्र का उद्देश्य चुिाऱ्ी फ्ऱीब़ी़ि क़ी राजि़ीनत और उसके आनथवक पररणामों क़ी आलोचिात्मक नर्र्ेचिा करिा है। साथ ह़ी यह शोध इस सर्ाल को भ़ी उठाएगा नक क्या भारत जैसे नर्कासश़ील देश में राजकोष़ीय उत्तरदानयत्व के साथ कल्याणकाऱी ि़ीनतयों के ब़ीच कोई संतुलि संभर् है।
KEYWORDS
भारत जैसे नर्कासश़ील लोकतंत्र में चुिाऱ्ी फ्ऱीब़ीज का प्रचलि ि केर्ल राजि़ीनतक प्रनतस्पधाव क़ी प्रकृनत को दशावता है, बब्सल्क यह कल्याणकाऱी राज्य क़ी अर्धारणा और सामानजक न्याय के प्रनत संर्ेदिश़ीलता को भ़ी पररलनक्षत करता है। दरअसल, गऱीबों, नकसािों, मनहलाओं और हानशये पर खडे समुदायों को लनक्षत कर द़ी जािे र्ाल़ी कई योजिाएँ — जैसे मुफ्त राशि, नकसािों को आय समथवि, या स्वास्थ्य ब़ीमा — समाज में व्याप्त नर्षमता को कम करिे तथा न्यूितम ज़ीर्ि स्तर सुनिनित करिे क़ी नदशा में महत्त्वपूणव भूनमका निभात़ी हैं। परंतु जब इन्हें राजि़ीनतक लाभ के उद्देश्य से गैर तानकव क तऱीके से नबिा नर्त्त़ीय आकलि, द़ीघवकानलक रणि़ीनत और लनक्षत नर्तरण के लागू नकया जाता है, तो ये योजिाएँ सार्वजनिक नर्त्त क़ी ब्सस्थरता के नलए खतरा बि जात़ी हैं। इस शोध में यह स्पष्ट हुआ है नक अत्यनधक और अनियंनत्रत फ्ऱीब़ीज का प्रर्ाह, नर्शेषकर चुिार्ों के दौराि, राजकोष़ीय उत्तरदानयत्व और बजट प्रबंधि अनधनियम द्वारा निधावररत राजकोष़ीय लक्ष्यों (जैसे राजकोष़ीय घाटे क़ी स़ीमा और ऋण-स्तर) को प्राप्त करिे में बाधा बिता है। इससे ि केर्ल बजट में निर्ेशात्मक व्यय (अर्संरचिा, नशक्षा, िर्ाचार आनद) के नलए संसाधि स़ीनमत होते हैं, बब्सल्क यह ऋण और ब्याज के दुष्चक्र में सरकार को धकेल सकता है। इसके अनतररक्त, मुफ्त र्स्तुएँ या सेर्ाएँ यनद समाज में निभवरता क़ी संस्कृनत को बढार्ा देत़ी हैं, तो इससे द़ीघवकाल में कायवश़ीलता और उत्पादकता पर भ़ी प्रनतकूल प्रभार् पडता है तथा सामानजक अकमवण्यता जैस़ी समस्याएं सामिे आ सकत़ी हैं। हालाँनक यह भ़ी िकारा िह़ीं जा सकता नक भारत जैसे असमािता-ग्रस्त और नर्नर्धतापूणव देश में कल्याणकाऱी हस्तक्षेप आर्श्यक हैं। इसनलए चुिाऱ्ी र्ादों के रूप में प्रस्तुत योजिाओं का मूल्यांकि ‘फ्ऱीब़ी़ि बिाम गैर-फ्ऱीब़ी़ि’ के द्वैध नर्मशव से हटकर नकया जािा चानहए। आर्श्यकता इस बात क़ी है नक सरकारें और ि़ीनत निमावता सामानजक कल्याण और राजकोष़ीय अिुशासि के ब़ीच संतुलि बिाए रखें। इसके नलए ि़ीनत निमावताओं को योजिाओं को राजि़ीनतक चश्मे से ि देखते हुए कल्याणकाऱी स्वरूप और तानकव कता से देखिा चानहए। इस प्रकार, भारत को ऐस़ी ि़ीनत अपिाि़ी होग़ी नजसमें लोकलुभार्ि र्ादे और उत्तरदाय़ी शासि, राजकोष़ीय संतुलि एक-दूसरे के पूरक हों ि नक नर्रोधाभास़ी। जब योजिाएँ नर्त्त़ीय अिुशासि, सामानजक आर्श्यकता और राष्टर ़ीय नर्कास के नत्रकोण में संतुनलत होकर लागू क़ी जाएंग़ी, तभ़ी हम एक समार्ेश़ी, आत्मनिभवर और स्थाय़ी आनथवक भनर्ष्य क़ी ओर अग्रसर हो सकेंगे।
1. Mohan, D. (2022, July 27). The Wire. Retrieved from https://thewire.in:https://thewire.in/government/revdi-culture-welfare-narendra-modi 2. Deshpande, R., Tillin, L., & Kailash, K. K. (2019). The BJP’s welfare schemes: Did they make a difference in the 2019 elections? Studies in Indian Politics, 7(2), 219-233. 3. Sharma, S. (August 26, 2024) India Today. https://www.indiatoday.in/diu/story/freebies-state-governments-centre-exorbitant-price-gdp-assembly-elections-political-parties-2587996-2024-08-26#google_vignette 4. India Today. (2023, March 20). Tamil Nadu budget 2023: Women to get Rs 1,000 monthly assistance. https://www.indiatoday.in 5. CNBC-TV18. (2023, March 20). Tamil Nadu Budget 2023 Highlights. https://www.cnbctv18.com 6. CNBC-TV18. (2023, March 20). Tamil Nadu Budget 2023 Highlights. https://www.cnbctv18.com 7. https://prsindia.org/budgets/states/punjab-budget-analysis-2024-25 8. Times of India. (2023, February 25). Free bus travel for women in Punjab crosses 3 crore rides. https://timesofindia.indiatimes.com/ 9. State Health Agency, Punjab. (2023). Sarbat Sehat Bima Yojana: Annual Report 2023. https://sha.punjab.gov.in/ 10. Jeelani, G. (2024, December 9). A decade of AAP govt’s free power spending in Delhi. LiveMint. https://www.livemint.com/elections/bjp-congress-follow-aap-freebies-free-power-soar-as-spending-jumps-from-290-cr-to-3-250-cr-11733723587047.html
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5/8/2026
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Double-Blind Peer Review
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The authors declare no conflict of interest related to this research work.
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