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Stream/Area:
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Subject:
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Paper ID:
IJSREM64155
Volume:
10 |
5 |
May 2026
Pages:
1-7
Publication Frequency:
Monthly (12 issues per year)
License:International Journal of Scientific Research in Engineering and Management follows the Creative Commons Attribution 4.0 (CC BY 4.0) License, allowing free use and distribution with proper attribution.
HISTORY DEPARTMENT
BRA BIHAR UNIVERSITY MUZAFFERPUR, BIHAR
HISTORY DEPARTMENT
BRA BIHAR UNIVERSITY MUZAFFERPUR, BIHAR
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BRA BIHAR UNIVERSITY MUZAFFERPUR, BIHAR
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BRA BIHAR UNIVERSITY MUZAFFERPUR, BIHAR
बिहार मे पाश्चात्य चिकित्सा की शुरुआत 18वीं सदी मे ही हो गयी थी परंतु 19वीं सदी के उतरार्ध मे इसका तेजी से प्रसार हुआ | भारत मे ब्रिटिश उपनिवेश के शुरुआती चरण मे पाश्चात्य चिकित्सा केवल ब्रिटिश सेना तक सीमित थी | 1857 की क्रांति के बाद जब सत्ता क्राउन के अधीन हो गयी तब भारत की जनता का भरोसा जीतने तथा सत्ता को स्थायी बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पाश्चात्य चिकित्सा का विकास किया गया | ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भारत मे संस्थागत रूप मे पाश्चात्य चिकित्सा का विकास सामाजिक नियंत्रण के लिए किया था | यद्यपि प्रारम्भ मे तीनों प्रान्तों (बंगाल, बॉम्बे,मद्रास) मे सार्वजनिक अस्पतालों की शुरुआत की गयी | बाद मे बिहार सहित सभी क्षेत्रों मे इसका प्रसार किया गया | हालांकि बंगाल प्रांत का हिस्सा होने के बाबाजूद बिहार के शहरी क्षेत्रों मे ही पाश्चात्य चिकित्सा का अधिक प्रसार हो पाया | 1912 मे स्वतंत्र प्रांत के रूप मे अस्तित्व मे आने के बाद बिहार मे सार्वजनिक स्वास्थ्य एक संगठित रूप मे उभरी | 20 वी सदी मे बिहार मे चिकित्सा सेवा का विस्तार किया गया, चिकित्सा बोर्ड की स्थापना की गयी | बिहार प्रांत के सभी जिलों मे अस्पताल तथा औषधालय खोले गए | मैडिसिन की शिक्षा के लिए मेडिकल कॉलेज एवं नर्सिंग स्कूलों की स्थापना की गई |
KEYWORDS
औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश शासन ने जितनी चिकित्सा समस्याओं का समाधान किया ,उससे कहीं अधिक रोगों का प्रसार किया | 19वीं शताव्दी में ब्रिटिश सैन्य अभियान के परिणामस्वरूप ‘हैजा’ महामारी के रूप में पूरे भारत में फ़ैल गया | वहीँ कृषि विकास की नीतिओं ने जलनिकासी की पारंपरिक प्रणालियो को बाधित किया | जिसके फलस्वरूप मलेरिया तथा जलजनित बीमारीओं का प्रकोप बढ़ गया | प्रारंभ में ब्रिटिश शासकों द्वारा प्रचारित पाश्चात्य चिकित्सा यूरोकेंद्रित थी | ब्रिटिश सैनिकों के स्वास्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए सैन्य अस्पतालों एवं चिकित्सा बोर्ड का गठन किया गया | परंतु ब्रिटिश प्रशासन और नागरिक टकराव को रोकने तथा सत्ता के स्थिरीकरण के लिए आमजन का भरोसा जीतना आवश्यक था | इसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ के लिए अस्पताल एवं स्वच्छता बोर्ड बनाए गए | यद्यपि 19वीं सदी की शुरुआत में बिहार प्रान्त में अस्पतालों एवं औषधालयों के विकास की गति धीमी हो गई थी परंतु 20वीं सदी के उतरार्ध तक बिहार के प्रत्येक जिले में सरकारी अस्पताल एवं स्वास्थ केंद्र खोले गए | हालाँकि बिहार प्रान्त की अधिकतर आवादी गाँव में निवास करती थी, परंतु इन क्षेत्रों में चिकित्सा सुबिधाओं ,स्वास्थ कर्मचारियों ,चिकित्सा उपकरण , दवाओं तथा चिकित्सकों की भारी कमी थी | महामारी के दौर में अस्पतालों में चिकित्सकों तथा कर्मियों की कमी के कारण उच्च मृत्यु दर दर्ज किये गए | इस दौरान महामारिओं तथा संक्रामक रोग को नियंत्रित करने के लिए कई कानून भी बनाए गए | स्वच्छता आयोग द्वारा स्वच्छता बोर्ड बनाए गए ताकि बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके | मेडिकल स्कूल एवं मेडिकल कॉलेज की स्थापना ने भी बिहारी युवाओं को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने में सहायता की | टीकाकरण अधिनियम तथा “मेटरनिटी एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी” की स्थापना से प्रसव के दौरान तथा बाद में होने वाले माता एवं शिशुओं की मृत्यु दर में कमी आई | सार्वजनिक स्वास्थ ब्यूरो तथा रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा स्वास्थ संबंधी प्रचार - प्रसार किये गए ताकि लोगों में बीमारीओं के प्रति जागरूकता लायी जा सके | इन प्रयासों के बावजूद गरीबी ,अशिक्षा एवं धर्मान्धता के कारण बिहारिओं का पाश्चात्य चिकित्सा के प्रति उदासीनता दिखाई देता था | स्वतंत्रता प्राप्ति के इतने वर्षों के बाद बिहार प्रान्त में कई मेडिकल कॉलेज तथा उन्नत तकनीक वाले सरकारी एवं निजी अस्पताल व डिस्पेंसरी खोले गए है | फिर भी वर्तमान समय तक बिहार शिक्षा एवं चिकित्सा के क्षेत्र में पिछड़ापन दिखाई देता हैं |
1.Harrison M. ‘Public Health in British India:Anglo – Indian Priventive Medicine, 1859-1914; Cambridge press 1994. 2.The Imperial Gazetteer of India Vol.iv ,Oxford: The Clarendon press 1907.p-461. 3.Harrison M. “Public Health in british India: Anglo –Indian Priventive In Medicine,1859-1914;Cambridge press 1994. 4.Kumar A. “Medicine And The Raj: British Medical Policy in India 1835-1911”,New Sage Publication ,1998. 5.Foriegn And Political Department ,Sainitary Branch Oct 1919, Programme No. 55-61,p-11. 6.Bihar And Orissa District Gazetteer, Patna (BSA) 7.Department of Education ,Government of India ,Sanitary 1919, Progs.No. 80, pp-3-6. 8.Departmentof Education, Health And Lands of Health Branch, 1934,Progs. No. 44-2/34-H, pp1-2. 9.Legislative Department, Sanitary Branch, January 1935, File No.34/35, pp-3-5. 10.Annual Public Health Report of The Province of Bihar And Orissa For the Year 1933.(BSA)
Publication Date
6/3/2026
Peer Review Type
Double-Blind Peer Review
Review Rounds: 2
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The authors declare no conflict of interest related to this research work.
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