Loading article...
Loading article...
Stream/Area:
-
Subject:
-
Paper ID:
IJSREM67274
Volume:
10 |
9 |
Sep 2026
Pages:
1-8
Publication Frequency:
Monthly (12 issues per year)
License:International Journal of Scientific Research in Engineering and Management follows the Creative Commons Attribution 4.0 (CC BY 4.0) License, allowing free use and distribution with proper attribution.
Economics
Swami Shukdevanand College, Shahjahanpur, UP
Economics
Swami Shukdevanand College, Shahjahanpur, UP
खाद्य सुरक्षा वकसी भी देश की सामावजक स्थिरताV आवर्थक विकास और मानि कल्याण का महत्वपूणथ आधार है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूणथ देश में खाद्य सुरक्षा का प्रश्न केिल पर्ाथप्त खाद्यान्न उत्पादन तक सीवमत नही ीं हैV बस्थि खाद्य की उपलब्धताV आवर्थक पहाँचV पोषण की गुणित्ता और दीर्थकावलक स्थिरता से भी जुडा है। बदलते राष्ट्र ीर् और िैविक पररदृश्य में जलिार्ु पररितथनV कृवष सींकटV आर्.असमानताV भूवम एिीं जल सींसाधनोीं पर दबािV खाद्य कीमतोीं में उतार.चढाि तर्ा आपूवतथ.श्ृींखला की कमजोररर्ााँ खाद्य सुरक्षा को अवधक जवटल बना रही हैं। इस शोध.पत्र में वितीर्क स्रोतोीं के आधार पर भारतीर् अर्थव्यििा में खाद्य सुरक्षा की अिधारणाV कृवष और खाद्य सुरक्षा का सींबींधV प्रमुख चुनौवतर्ााँV सरकारी नीवतर्ााँV तकनीकी विकासV ग्रामीण विकासV मवहला भागीदारीV शहरीकरणV भींडारण एिीं आपूवतथ.श्ृींखला तर्ा सतत विकास के सींदभथ में विश्लेषण वकर्ा गर्ा है। राष्ट्र ीर् खाद्य सुरक्षा अवधवनर्मV सािथजवनक वितरण प्रणाली तर्ा कृवष.सींबींधी र्ोजनाओीं की भूवमका पर भी चचाथ की गई है। अध्यर्न से स्पष्ट् होता है वक भारत ने खाद्यान्न उपलब्धता और वितरण के क्षेत्र में महत्वपूणथ प्रगवत की हैV लेवकन समािेशी पोषण सुरक्षाV अींवतम व्यस्थि तक पहाँचV जलिार्ु.लचीली कृवष और कुशल आपूवतथ.श्ृींखला के क्षेत्र में वनरीं तर सुधार की आिश्यकता है।
KEYWORDS
बदलते पररदृश्य में भारतीर् अर्थव्यििा के वलए खाद्य सुरक्षा एक बहआर्ामी चुनौती है, वजसमें उत्पादन, वितरण, आवर्थक पहाँच, पोषण और स्थिरता सभी शावमल हैं। भारत ने खाद्यान्न उत्पादन और सािथजवनक वितरण व्यििा में उल्लेखनीर् प्रगवत की है, लेवकन सभी नागररकोीं तक पर्ाथप्त और पौवष्ट्क भोजन की समान पहाँच सुवनवित करना अभी भी महत्वपूणथ नीवत लक्ष्य है। जलिार्ु पररितथन, सींसाधनोीं की कमी, आर्-असमानता, पोषण असुरक्षा और आपूवतथ-श्ृींखला की कमजोररर्ााँ भविष्य की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। अतः खाद्य सुरक्षा को कृवष नीवत तक सीवमत रखने के बजार् इसे रोजगार, ग्रामीण विकास, सामावजक सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, तकनीकी निाचार और सतत विकास के सार् एकीकृत करना आिश्यक है। सरकार, कृवष सींिानोीं, बाजार तींत्र, िानीर् वनकार्ोीं और समुदार्ोीं के समस्थन्वत प्रर्ास से खाद्य सुरक्षा को अवधक समािेशी और वटकाऊ बनार्ा जा सकता है। सही नीवतगत वदशा, तकनीकी निाचार और सींसाधनोीं के वििेकपूणथ उपर्ोग के माध्यम से भारत न केिल अपनी खाद्य आिश्यकताओीं को सुरवक्षत कर सकता है, बस्थि िैविक खाद्य सुरक्षा में भी प्रभािी र्ोगदान दे सकता है।
1. वसींह, रमेश. Indian Economy. 2. कवपला, उमा. Indian Economy: Performance and Policies. 3. आचार्थ, एस. एस. एिीं अग्रिाल, एन. एल. Agricultural Economics. 4. देि, एस. महेंद्र. Food Security in India: Performance, Challenges and Policies. 5. भारत सरकार. Economic Survey of India, विवभन्न सींस्करण. 6. भारत सरकार, कृवष एिीं वकसान कल्याण मींत्रालर्. Annual Reports, विवभन्न िषथ. 7. Food and Agriculture Organization (FAO). The State of Food Security and Nutrition in the World, निीनतम उपलब्ध सींस्करण. 8. नीवत आर्ोग. भारत में पोषण एिीं खाद्य सुरक्षा पर ररपोटें, 2021–2024. 9. George, G. एिीं McKay, D. (2019). भारत की सािथजवनक वितरण प्रणाली एिीं खाद्य सुरक्षा से सींबींवधत व्यिस्थित सावहत्य समीक्षा. 10. McKay, D., Sims, M. एिीं van der Pligt, J. (2023). भारत में खाद्य असुरक्षा के मापन से सींबींवधत व्यिस्थित समीक्षा.
Publication Date
9/15/2026
Peer Review Type
Double-Blind Peer Review
Review Rounds: 2
Documents
Article Views
1
Total views since publication
PDF Downloads
8
Total downloads since publication
Geographic Reach
5
Digital Preservation: This article is permanently archived on Zenodo and complies with all data preservation standards across major indexing platforms.
Plagiarism Screening
This manuscript has been checked for plagiarism using TurnitinPlagiarismChecker software.
Conflict of Interest
The authors declare no conflict of interest related to this research work.
Funding Information
No funding information available for this research.
Related research in the same subject area
Loading similar articles...