Loading article...
Loading article...
Stream/Area:
-
Subject:
-
Paper ID:
IJSREM66758
Volume:
10 |
8 |
Aug 2026
Pages:
1-7
Publication Frequency:
Monthly (12 issues per year)
License:International Journal of Scientific Research in Engineering and Management follows the Creative Commons Attribution 4.0 (CC BY 4.0) License, allowing free use and distribution with proper attribution.
University Department of IRPM
Tilka Manjhi Bhagalpur University
भारत में बाल श्रम आज एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक और नैतिक समस्या के रूप में विद्यमान है। यद्यपि संविधान में सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार और शोषण से मुक्ति का प्रावधान है, तथापि पारिवारिक मजबूरियों के कारण बच्चे श्रम कार्यों में संलग्न हैं। यह समस्या केवल आर्थिक दृष्टि से भारत में बाल श्रम की समस्या का विश्लेषण नहीं करती, बल्कि मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी प्रश्न है। भारत में बाल श्रम की समस्या लंबे समय से चली आ रही सामाजिक, आर्थिक और नैतिक चुनौती है। यह समस्या केवल आर्थिक विषमता का परिणाम नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक सोच, कानून की कमजोरी और विकास की असमानता का मिश्रण भी है। भारतीय संविधान में बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई प्रावधान हैं, फिर भी लाखों बच्चे आज भी विभिन्न उद्योगों, घरेलू कार्यों, कृषि, निर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यह शोध बाल श्रम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति, कारण, प्रभाव और चुनौतियों का सामाजिक दृष्टिकोण से गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य भारत में बाल श्रम की वास्तविक स्थिति को उजागर करना, उसके समाधान हेतु नीतिगत सुझाव देना तथा यह समझना है कि क्या वर्तमान कानून और नीतियाँ पर्याप्त हैं या नहीं। बाल श्रम, उद्योग, अनुच्छेद, शिक्षा, पारिवारिक, सामाजिक एवं आर्थिक समस्या से संबंधित है। एक संस्कृत समाज का सर्वोपरि लक्ष्य होता है बच्चों को अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना। यह बच्चों का जन्मजात अधिकार है। भारत में बाल श्रम समस्या एक चुनौती बन गई है। देश में कामकाजी बच्चों की वास्तविक संख्या बहुत अधिक है। जातिगत गरीबी, परिवार का आकार तथा आय, शिक्षा और शिक्षा का स्तर आदि गहन सामाजिक-आर्थिक समस्याएँ हैं। समाज के सभी वर्गों में जागरूकता लाने के साथ-साथ सोच और नजरिया भी बदलने की जरूरत है।
KEYWORDS
शोध से यह स्पष्ट हुआ कि भारत में बाल श्रम की जड़ें गरीबी, शिक्षा की कमी और कानूनी प्रवर्तन की कमजोरी में गहराई से निहित हैं। जहाँ साक्षरता, रोजगार और सामाजिक जागरूकता अधिक है, वहाँ बाल श्रम की दर न्यूनतम पाई गई। सरकारी कानून और योजनाएँ पर्याप्त हैं, पर उनका जमीनी कार्यान्वयन अभी भी अधूरा है। सामाजिक मानसिकता, परिवार की आर्थिक स्थिति और शिक्षा का प्रसार ही इस समस्या के स्थायी समाधान की कुंजी है। बाल श्रम की समस्या को खत्म करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें शिक्षा, आर्थिक सुधार और सामाजिक जागरूकता सभी शामिल हों। केवल एक समयबद्ध और संगठित प्रयास ही इस समस्या को पूरी तरह समाप्त कर सकता है और बच्चों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित भविष्य प्रदान कर सकता है।
1. Child Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986. 2. Child Labour Amendment Act, 2016. 3. Ministry of Labour and Employment, Govt. of India Reports (2020-2024). 4. ILO Global Report on Child Labour (2021). 5. UNICEF India: Child Protection Data (2023). 6. Census of India (2011, 2021 Estimates). 7. NCLP Scheme Guidelines. 8. Right to Education Act, 2009. 9. Commission for Protection of Child Rights Act, 2005.
Publication Date
8/14/2026
Peer Review Type
Double-Blind Peer Review
Review Rounds: 2
Documents
Article Views
0
Total views since publication
PDF Downloads
3
Total downloads since publication
Geographic Reach
5
Digital Preservation: This article is permanently archived on Zenodo and complies with all data preservation standards across major indexing platforms.
Plagiarism Screening
This manuscript has been checked for plagiarism using TurnitinPlagiarismChecker software.
Conflict of Interest
The authors declare no conflict of interest related to this research work.
Funding Information
No funding information available for this research.
Related research in the same subject area
Loading similar articles...