पर्यटन का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण
डॉ0 मनुजेन्द्र कुमार
माध्यमिक शिक्षक, जिला स्कूल, भागलपुर (बिहार)
शोध-सार
पर्यटन आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक बन चुका है, जो किसी भी देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है। पर्यटन का तात्पर्य लोगों के अपने निवास स्थान से बाहर विभिन्न उद्देश्यों जैसे मनोरंजन, शिक्षा, व्यापार, धर्म अथवा स्वास्थ्य के लिए अस्थायी रूप से यात्रा करने से है। यह गतिविधि केवल अवकाश तक सीमित न होकर एक संगठित उद्योग के रूप में विकसित हो चुकी है, जिसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में परिलक्षित होता है। प्रस्तुत सार में पर्यटन के इन्हीं प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। पर्यटन का सबसे प्रमुख सकारात्मक प्रभाव रोजगार सृजन के रूप में देखा जाता है। होटल, परिवहन, रेस्तरां, ट्रैवल एजेंसियाँ, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और मार्गदर्शक सेवाएँ प्रत्यक्ष रूप से पर्यटन पर निर्भर होती हैं। इससे कुशल, अर्द्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए व्यापक रोजगार अवसर उत्पन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त पर्यटन विदेशी मुद्रा अर्जन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो भुगतान संतुलन को सुदृढ़ करता है और राष्ट्रीय आय में वृद्धि करता है। पर्यटन के कारण बुनियादी ढाँचे जैसे सड़क, हवाई अड्डे, संचार व्यवस्था और स्वच्छता सुविधाओं का विकास होता है, जिसका लाभ स्थानीय जनता को भी प्राप्त होता है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में पर्यटन स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देता है, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होती है और समावेशी आर्थिक विकास संभव होता है। हालाँकि, पर्यटन के नकारात्मक आर्थिक प्रभावों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती। अत्यधिक पर्यटन के कारण स्थानीय बाजारों में महँगाई बढ़ जाती है, जिससे आवश्यक वस्तुएँ स्थानीय निवासियों की पहुँच से बाहर हो सकती हैं। भूमि और आवास की कीमतों में वृद्धि से सामाजिक असंतोष उत्पन्न होता है। पर्यटन पर अत्यधिक निर्भरता अर्थव्यवस्था को अस्थिर भी बना सकती है, क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, राजनीतिक अस्थिरता या वैश्विक मंदी के समय पर्यटन उद्योग सबसे पहले प्रभावित होता है। इसके अतिरिक्त, पर्यावरणीय क्षरण जैसे प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण और पारिस्थितिक असंतुलन दीर्घकालीन आर्थिक विकास के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
अतः स्पष्ट है कि पर्यटन एक दोधारी तलवार के समान है। यदि इसे योजनाबद्ध, संतुलित और सतत दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जाए, तो यह आर्थिक समृद्धि, रोजगार और क्षेत्रीय विकास का सशक्त माध्यम बन सकता है। वहीं, यदि इसके नकारात्मक प्रभावों पर नियंत्रण न रखा जाए, तो यह आर्थिक असमानता और पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकता है। इसलिए सतत पर्यटन नीतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है, जिससे पर्यटन के सकारात्मक प्रभावों को अधिकतम और नकारात्मक प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके।
शब्दकुंजी: सकारात्मक प्रभाव, नकारात्मक प्रभाव, आर्थिक समृद्धि, रोजगार और क्षेत्रीय विकास आदि