अद्वैतवेदान्तदर्शने चेतनातत्त्वस्य वैज्ञानिकपरिशीलनम् : आधुनिकप्रासङ्गिकता।
सौम्यदीप सरदार
GUJARAT UNIVERSITY
सारांश
अद्वैत वेदान्त भारतीय दर्शन की अत्यन्त महत्वपूर्ण और प्रभावशाली परम्परा है, जिसका मुख्य प्रतिपाद्य विषय ब्रह्म, आत्मा और चेतना का स्वरूप है। इस दर्शन के अनुसार चेतना (चैतन्य) ही समस्त जगत की मूल सत्ता है और वही ब्रह्म के रूप में सर्वव्यापी तथा अनन्त है। अद्वैत वेदान्त का मूल सिद्धान्त “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः” के रूप में व्यक्त किया जाता है, जिसके अनुसार ब्रह्म ही परम सत्य है तथा जीव और ब्रह्म में कोई वास्तविक भेद नहीं है। इस दृष्टिकोण में चेतना को न केवल मानव अनुभव का आधार माना गया है, बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की वास्तविकता का मूल तत्त्व भी माना गया है।
वर्तमान युग में चेतना का अध्ययन आधुनिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों जैसे न्यूरोसाइंस, मनोविज्ञान, संज्ञानात्मक विज्ञान और क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics ) में भी व्यापक रूप से किया जा रहा है। वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि चेतना किस प्रकार उत्पन्न होती है और उसका मानव अनुभव तथा व्यवहार से क्या संबंध है। हालांकि वैज्ञानिक पद्धति मुख्यतः अनुभवजन्य और प्रयोगात्मक है, फिर भी चेतना के प्रश्न पर अभी तक पूर्ण सहमति स्थापित नहीं हो पाई है। इसी संदर्भ में प्राचीन भारतीय दार्शनिक परम्पराएँ विशेष रूप से अद्वैत वेदान्त एक महत्वपूर्ण वैचारिक आधार प्रदान करती हैं।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य अद्वैत वेदान्त में प्रतिपादित चेतनातत्त्व का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करना तथा उसकी आधुनिक प्रासंगिकता को स्पष्ट करना है। इसमें अद्वैत वेदान्त के प्रमुख सिद्धान्तों, विशेष रूप से आत्मा, ब्रह्म और चेतना के स्वरूप का अध्ययन करते हुए यह देखा गया है कि इन विचारों का आधुनिक वैज्ञानिक चिंतन से किस प्रकार संबंध स्थापित किया जा सकता है। साथ ही यह भी विश्लेषण किया गया है कि अद्वैत वेदान्त की शिक्षाएँ वर्तमान समाज में मानसिक शांति, नैतिक मूल्यों तथा वैश्विक एकता की भावना को विकसित करने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं।
अतः यह कहा जा सकता है कि अद्वैत वेदान्त का चेतना-सिद्धान्त केवल दार्शनिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथा व्यावहारिक दृष्टि से भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आधुनिक युग में विज्ञान और आध्यात्म के समन्वय के माध्यम से चेतना के गहन रहस्य को समझने की दिशा में अद्वैत वेदान्त एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।
मुख्य शब्द: अद्वैत वेदान्त, चेतना, ब्रह्म, आत्मा, विज्ञान, आधुनिक प्रासंगिकता।